Sonu Nigam, Jaan-e-Mann – Ajnabi Sheher Hai – (अजनबी शहर है)

अजनबी शहर है
अजनबी शाम है
ज़िन्दगी अजनबी क्या तेरा नाम है
अजीब है ये ज़िन्दगी ये ज़िन्दगी अजीब है
ये मिलती है बिछ्ड़ती है, बिछड़के फिर से मिलती है

आप के बगैर भी हमें
मीठी लगे उदासियाँ
क्या ये आप का कमाल है
शायद आपको ख़बर नहीं
हिल रही है पांव की ज़मीन
क्या ये आप का ख्याल है
अजनबी शहर में ज़िन्दगी मिल गई
अजीब है ये ज़िन्दगी ये ज़िन्दगी अजीब है
में समझा था करीब है ये औरों का नसीब है
अजनबी शहर है…

बात है ये एक रात की
आप बादलों पे लेटे थे
वो याद है आपने बुलाया था
सर्दी लग रही थी आपको
पतली चांदनी लपेटे थे
और शौल में ख्वाब के सुलाया था
अजनबी ही सही साँस में सिल गई
अजीब है ये ज़िन्दगी ये ज़िन्दगी अजीब है
मेरे नहीं ये ज़िन्दगी रकीब का नसीब है


Movie/Album: जान-ए-मन (2006)
Music By: अनु मलिक
Lyrics By: गुलज़ार
Performed By: सोनू निगम