वीरासन – योग करने के सही तरीके #16

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वीरासन

वीर का अर्थ होता है बहादुर। इसके अभ्यास से हाथ-पैर मजबूत हो जाते हैं। वज्रासन और वीरासन में कोई खास फर्क नहीं होता। वैसे ‍वीरासन की कई और भी स्थितियां होती है। यहां प्रस्तुत है वीरासन की सामान्य विधि।

विधि

समतल भूमि पर नर्म आसन बिछाकर वज्रासन की स्थिति में बैठ जाएं। अर्थात, घुटनों को मोड़कर बैठ जाएं।

अब दोनों पैरों को थोड़ा फैलाएं और हिप्स को भूमि पर टिकाकर सीध में रखें।

अब दोनों हाथों को घुटनों पर सीधा तानकर रखें।

कंधों को आराम की मुद्रा में रखें और तनकर बैठें। सिर को सीधा रखें और सामने की ओर देखें। इस मुद्रा में 30 सेकेंड से 1 मिनट तक बने रहें।

सावधानी

जब आपके घुटनों एवं टखनों में किसी प्रकार की परेशानी महसूस हो उस समय इस योग मुद्रा का अभ्यास नहीं करना चाहिए।

लाभ

इस आसन के नियमित अभ्यास से अधिक नींद आने की समस्या पर नियंत्रण हो सकेगा। जंघा और पांव शक्तिशाली बनते हैं। शरीर का भारीपन दूर होता है। श्वसन एवं ध्यान मुद्रा के संदर्भ में वीरासन काफी उपयोगी है।

वीरासन योग में जंघाओं, घुटनों, पैरों एवं कोहनियों का व्यायाम होता है। इस मुद्रा से शरीर का पीछला भाग संतुलित रहता है। शरीर को सुडौल बनाए रखने के लिए भी यह योग लाभप्रद है।